सुना अनसुना कर देना चाहिए नकारात्मक बातों को

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अक्सर हम देखते है की कुछ लोग हमेशा नकारात्मक बताएं ही करते रहते है यह नकारात्मक बातें अक्सर वही लोग किया करते हैं जिन्होंने अपने जीवन में कुछ ना किया हो या करने की इच्छाशक्ति ही न हो, ऐसे लोग खुद अपने जीवन में कुछ नहीं करते और दूसरों को भी कुछ करने नहीं देते। कभी भी उनकी बातों को सुना अनसुना कर देना  चाहिए और अपने लक्ष्य की और ही ध्यान अग्रसित करना चाहिए.

आज हम आपको एक छोटी सी कहानी के माध्यम से बताना चाहेंगे की कैसे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है.

तो आइये पढ़ते है मेंढक की सकारात्मकता से भरी कहानी…

एक समय की बात है है एक जंगल में थोड़े से मेंढक रहते थे। एक बार जंगल के कुछ जानवरों नें सोचा क्यों ना इन मेंढकों की दौड़ कराई जाये। दौड़ प्रतियोगिता के अनुसार उन्हें एक मीनार (Tower) के ऊपर चढ़ना था जो उस मीनार की चोटी  पर सबसे पहले पहुँचेगा वही विजेता घोषित होगा।

मेंढकों की दौड़ प्रतियोगिता के अवसर पर जंगल के सभी जानवर आये। वैसे तो इस दौड़ प्रतियोगिता में किसी भी दर्शक को यह विश्वास नहीं था कि कोई भी मेंढक मीनार की चोटी तक पहुँच पायेगा।

लोगों के मुह से अजीब-अजीब बातें निकलते हुए सब कोई सुन रहे थे। कोई कहता था :

“यह तो असंभव ही लग रहा है”

“कोई भी मीनार की चोटी तक नहीं पहुँच पायेगा”

“यह तरीका बहुत ही मुश्किल तरीका है”

दौड़ शुरू हुई – दर्शक चिल्लाने लगे ! सभी मेंढक मीनार की चोटी की ओर चढ़ने लगे ! कुछ मेंढक तो शुरुआत में ही गिरने लगे !

यह देखकर लोग और ज्यादा कहने लगे “अब कोई भी इस प्रतियोगिता में सफल नहीं हो पायेगा”

धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हुए मेंढक थकते गए और हार मान कर एक के बाद एक गिरने लगे !

दर्शक देखकर अचम्भे में पड़ गए कि एक मेंढक दौड़ में ऊपर चढ़ते ही चला जा रहा है ! और बिना हार माने कुछ ही समय में वह मीनार की चोटी तक पहुँच गया।

उस छोटे मेंढक के चोटी पर पहुँचने की बात पर बाकि मेंढक और दर्शक हैरानी में पद गए। उन्होंने उस छोटे मेंढक से प्रश्न किया कि आखिर वह ऐसा करने में सफल कैसे हुआ?

इसके बाद जो सबको पता चला वह बहुत ही अजीब बात थी कि उनको पता चला कि वह मेंढक बहरा था।

उसके बहरा होने के कारण वह लोगों की बेकार बातों को सुने बिना अपने लक्ष्य तक पहुँच सका। इसलिए कहा जाता है ! नकारात्मक सोच और बातें ही आपको नकारात्मक बनाती है इसलिए जितना हो सके नकारात्मक बातों से दूर रहें और उन्हें सुनकर भी अनसुना कर दें.

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