गुरु नानक देव जी ने बताया भक्ति और सम्पत्ति में क्या फर्क होता है

87 0

एक बार काशी के निकट के एक इलाके के नवाब ने गुरु नानक देव जी से पूछा, ‘आपके प्रवचन का महत्व ज्यादा है या हमारी दौलत का?’ नानक देव जी ने कहा, ‘इसका जवाब उचित समय पर दूंगा।’ कुछ समय बाद नानक देव जी ने नवाब को काशी के अस्सी घाट पर एक सौ स्वर्ण मुद्राएं लेकर आने को कहा। नानक देव जी वहां प्रवचन कर रहे थे। नवाब ने स्वर्ण मुद्राओं से भरा थाल नानक देव जी के पास रख दिया और पीछे बैठ कर प्रवचन सुनने लगा।

वहां एक थाल पहले से रखा हुआ था। प्रवचन समाप्त होने के बाद नानक देव जी ने थाल से स्वर्ण मुद्राएं मुट्ठी में लेकर कई बार खनखनाईं। भीड़ को पता चल गया कि स्वर्ण मुद्राएं नवाब की तरफ से नानक देव जी को भेंट की गई हैं। थोड़ी देर बाद अचानक नानक देव जी ने थाल से स्वर्ण मुद्राएं उठा कर गंगा में फेंकना शुरू कर दिया। यह देख कर वहां अफरातफरी मच गई। कई लोग स्वर्ण मुदाएं लेने के लिए गंगा में कूद गए। भगदड़ में कई लोग घायल हो गए। मारपीट की नौबत आ गई।

नवाब को समझ में नहीं आया कि आखिर नानक देव जी  ने यह सब क्यों किया। तभी नानक देव जी ने जोर से कहा, ‘भाइयों, असली स्वर्ण मुद्राएं मेरे पास हैं। गंगा में फेंकी गईं मुदाएं नकली हैं। आप लोग शांति से बैठ जाइए।’ जब सब लोग बैठ गए तो नवाब ने पूछा, ‘आप ने यह तमाशा क्यों किया? धन के लालच में तो लोग एक दूसरे की जान भी ले सकते हैं।

नानक देव जी ने कहा, ‘मैंने जो कुछ किया वह आपके प्रश्न का उत्तर था। आप ने देख लिया कि प्रवचन सुनते समय लोग सब कुछ भूल कर भक्ति में डूब जाते हैं। लेकिन माया लोगों को सर्वनाश की ओर ले जाती है। प्रवचन लोगों में शांति और सद्भावना का संदेश देता है मगर दौलत तो विखंडन का रास्ता है।’ नवाब को अपनी गलती का अहसास हो गया और गुरु नानक देव जी के चरणों में गिर गया.

यदि आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर जरुर करें. धन्यवाद्.

Related Post

सावन 2026: भांग-ड्रायफ्रूट से सजे बाबा महाकाल, रजत आभूषणों में दिखा महादेव का राजसी वैभव

Posted by - August 13, 2026 0
सावन 2026 के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का भव्य और दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं…

साल के आखिरी बड़ा मंगल पर करें ये खास पूजा, बरसेगा बजरंग बली का आशीर्वाद

Posted by - June 23, 2026 0
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार, जिन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है, भगवान हनुमान की विशेष…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *