अल्मोड़ा: महादेव शंकर के धाम जागेश्वर में इन दिनों जागनाथ महोत्सव की धूम मची हुई है. अल्मोड़ा के जागेश्वर में चलने वाले इस पांच दिवसीय महोत्सव में कला संगीत और संस्कृति का समागम देखने को मिल रहा है. महोत्सव में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सहित पर्यटक पहुंच रहे हैं. प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार इस महोत्सव में उत्तराखंड की संस्कृति सहित अन्य रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हैं |

जागेश्वर महोत्सव स्थल में दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का आरंभ किया गया. जिसमें अल्मोड़ा सहित क्षेत्र के विभिन्न बाल कलाकारों ने अनेक मनमोहन लोक नृत्य एवं कथक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया. वहीं कुमाऊं की संस्कृति का प्रतीक छोलिया नृत्य की प्रस्तुति भी कलाकारों ने दी. वहीं देर रात्रि तक चले कार्यक्रमों में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायकों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा |
इस दौरान जागनाथ महोत्सव के आयोजक अजय सुयाल और मनोज चम्याल ने बताया यह महोत्सव 12 नवंबर से शुरू किया गया. 16 नवंबर को संपन्न होगा. महोत्सव का उद्देश बताते हुए कहा कि हमारी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है. जिससे नई युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति के बारे में जान सके. नए कलाकारों को मंच मिल सके. इस महोत्सव के दौरान जहां हमारे झोड़ा, छपेली, चांचरी, भागनौल आदि की प्रस्तुति हो रही है वहीं प्रदेश भर से आए कलाकार अपनी लोक संस्कृति की प्रस्तुति दे रहे हैं |
महोत्सव का आनंद लेने पर्यटक भी पहुंच रहे हैं. इस दौरान गायन और नृत्य प्रतियोगिताएं भी कराई जा रहीं हैं. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्र के विधायक मोहन सिंह मेहरा ने कहा ज जागेश्वर महोत्सव एक अपूर्व महोत्सव है. उन्होंने आयोजकों की तारीफ करते हुए कहा कियुवाओं और नई प्रतिभाओं को आगे लाने का सराहनीय कार्य वह कर रहे हैं. विधायक ने इस महोत्सव को गर्मी के मौसम में करने की भी सलाह दी |
जागेश्वर धाम आस्था का प्रतीक: अल्मोड़ा से 35 किलोमीटर दूर स्थित देवदार के वनों से घिरे जागेश्वर धाम में देश भर से लोग आस्था के साथ पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं. भगवान भोलेनाथ के जागेश्वर धाम में लोगों की अपार आस्था है. जहां प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ के दर्शन को भक्तों को लाइन लगी रहती है. मान्यता है कि जागेश्वर धाम में शिवरात्रि को विशेष पूजा के साथ जो भी भक्त पुत्र प्राप्ति चाहता है वह पूरी रात हाथ में दिया रख कर बाबा का ध्यान लगाता है तो उसकी इच्छा पूरी होती है. सावन के महीने में यहां श्रावण मेला भी लगता है. पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस जागेश्वर धाम में पूजा अर्चना करने को आ चुके हैं. वर्तमान में इस मंदिर को भव्य बनाने के लिए सरकार की ओर से विकास कार्य किया जा रहा है |