हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कैबिनेट बैठक अब बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि चुनावी आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार ने कई लोक-लुभावन फैसले लेकर वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की है। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी ने राज्य चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ के तहत 2 लाख रुपये से कम सालाना आय वाले परिवारों की महिलाओं को ₹1500 प्रति माह पेंशन देने का था। इसके अलावा सरकार ने ‘हिम चंडीगढ़’ नाम से नया शहर बसाने, दुकानों को 24 घंटे खोलने की अनुमति देने, मेडिकल कॉलेज प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने और कई कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि जैसे फैसलों को भी मंजूरी दी।
बीजेपी सांसद हर्ष महाजन और पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान इस तरह की घोषणाएं सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हैं। वहीं राज्य चुनाव आयुक्त अनिल कुमार खची ने कहा कि शिकायत की जांच की जाएगी, लेकिन आयोग तब तक ऐसी बैठकों को नहीं रोक सकता जब तक उनका मतदान प्रक्रिया पर सीधा असर साबित न हो।
अब हिमाचल में यह मुद्दा सिर्फ पेंशन योजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी आचार संहिता और सरकारी फैसलों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।