अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उनकी ओर से दिए गए व्यापार समझौते तोड़ने की धमकी के बाद कम हुआ था। मियामी में अमेरिका बिज़नेस फ़ोरम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी चेतावनी के बाद दोनों परमाणु-सशस्त्र देश “युद्ध के कगार से पीछे हट गए” और “शांति स्थापित कर ली।” ट्रंप का यह दावा नया नहीं है—वह इसे कई बार दोहरा चुके हैं—हालाँकि भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने उनके इस दावे को पहले ही खारिज किया है।
अपने भाषण में ट्रंप ने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न देशों के बीच चल रहे तनाव कम किए। उन्होंने कहा, “आठ महीनों में मैंने आठ युद्ध समाप्त किए। जिनमें कोसोवो और सर्बिया, कांगो और रवांडा, और पाकिस्तान और भारत शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं उस समय भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा था। तभी मैंने अख़बार में पढ़ा कि दोनों देशों के बीच स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और कई विमान मार गिराए गए हैं। मैंने तुरंत कॉल किया और कहा—अगर यह जारी रहा, तो हम कोई व्यापार समझौता नहीं करेंगे। हम आपके साथ व्यापार नहीं कर सकते यदि आप युद्ध कर रहे हों।”
ट्रंप ने दावा किया कि उनकी इस चेतावनी के एक दिन बाद दोनों देशों ने उन्हें फोन कर कहा कि “हमने शांति स्थापित कर ली है।” ट्रंप ने तालियों के बीच कहा, “टैरिफ ने ऐसा किया। अगर टैरिफ नहीं होते, तो यह कभी नहीं होता।”
हालांकि, ट्रंप के इस बयान को भारत और पाकिस्तान दोनों ने पहले ही खारिज किया था। दोनों देशों का कहना है कि कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत स्वतंत्र रूप से होती है, और अमेरिका का उस प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं था। भारत ने स्पष्ट कहा है कि “भारत-पाकिस्तान मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं है।”
उल्लेखनीय है कि 10 मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि अमेरिका की मध्यस्थता में “लंबी रात” की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच “पूर्ण और तत्काल युद्धविराम” हुआ। तब से लेकर अब तक वह 60 से अधिक बार सार्वजनिक रूप से इसका श्रेय खुद को दे चुके हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान अमेरिकी राजनीति की पृष्ठभूमि में है, जहाँ ट्रंप अक्सर अपनी विदेश नीति को सफलताओं के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वहीं कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान तनाव कई जटिल भू-राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से जुड़ा है, जिसे केवल व्यापार वार्ता के स्तर पर प्रभावित करना संभव नहीं माना जाता।
भले ही ट्रंप के दावों पर विवाद जारी है, लेकिन उनका यह बयान फिर एक बार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता के सवाल को केंद्र में ले आया है।