याचिका का असर : स्वास्थ्य सचिव-डीजी कोर्ट में तलब

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की सरकारी अस्पतालों में घट रही स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव और डीजी स्वास्थ्य को कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाना सरकार की मूल जिम्मेदारी है और लापरवाही को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि पर्वतीय जिलों के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा। कई जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक पद खाली चल रहे हैं, जबकि संसाधन भी न्यूनतम हैं। कोर्ट ने इस स्थिति पर गंभीर नाराज़गी जताते हुए सरकार से पूछा कि आखिर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

दिव्यांगजन आयुक्त को कोर्ट में पेश होने के आदेश

इसी सुनवाई के दौरान एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई। शिक्षा विभाग ने बताया कि प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक दस्तावेज़ अभी लंबित हैं। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिव्यांगजन आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि दिव्यांगजन प्रमाण-पत्र देर से जारी होने के कारण हजारों बच्चे छात्रवृत्ति, विशेष शिक्षा योजनाओं और सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। इससे उनके अधिकारों का हनन होता है, जिसके लिए विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि इस प्रकार की देरी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं की जा सकती।

स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा अनिवार्य

याचिका में उल्लेख किया गया कि पहाड़ों के कई जिला और बेस अस्पतालों में न तो विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही पर्याप्त दवाइयाँ तथा तकनीकी स्टाफ। ऑपरेशनल थिएटर से लेकर मातृ-शिशु इकाइयों तक कई महत्वपूर्ण सेवाएँ कागज़ों में तो मौजूद हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर गंभीर कमी साफ नजर आती है।

कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि—

  • पहाड़ों में डॉक्टरों की तैनाती की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
  • रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की रूपरेखा बताई जाए।
  • चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना दी जाए।

अगली सुनवाई तक स्वास्थ्य सचिव और डीजी स्वास्थ्य को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहकर जवाब देना होगा।

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