सावन 2026: भांग-ड्रायफ्रूट से सजे बाबा महाकाल, रजत आभूषणों में दिखा महादेव का राजसी वैभव

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सावन 2026 के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का भव्य और दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। गुरुवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त में भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल का भांग, ड्रायफ्रूट, रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला और स्वर्ण-रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के राजसी स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

ब्रह्ममुहूर्त में शुरू हुई पूजा-अर्चना

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट ब्रह्ममुहूर्त में खोले गए, जिसके बाद गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजन किया गया। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और “जय महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे।

पंचामृत से हुआ बाबा महाकाल का अभिषेक

प्रातःकालीन पूजा के दौरान भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद पवित्र जल अर्पित कर कपूर आरती संपन्न हुई और श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना की।

चंदन, भांग और रजत आभूषणों से हुआ विशेष श्रृंगार

अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का चंदन, भांग, रजत चंद्र, रजत मुकुट, त्रिपुंड और गुलाब के पुष्पहारों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई, जिसके बाद भस्म आरती का दिव्य आयोजन हुआ।

राजसी स्वरूप ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राजाधिराज के स्वरूप में सजाया गया। इस विशेष श्रृंगार में रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला, भांग, ड्रायफ्रूट तथा स्वर्ण-रजत आभूषणों का उपयोग किया गया। सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित महादेव का यह अलौकिक स्वरूप भक्तों को भावविभोर कर गया।

फल और मिष्ठान का लगाया गया भोग

विशेष श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की गई। देश-विदेश से आए हजारों भक्तों ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व

महाकाल मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही वजह है कि सावन के दौरान हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर इस अद्भुत आरती में शामिल होते हैं।

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