अमूल को मिला विश्व की नंबर एक सहकारी संस्था का दर्जा
अमूल को हाल ही में वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर रिपोर्ट में विश्व की नंबर 1 सहकारी संस्था का दर्जा मिला है। इस रिपोर्ट में दुनिया की सभी बड़ी सहकारी संस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है। अमूल को यह सम्मान उसके मजबूत नेटवर्क, साफ-सुथरी कार्यप्रणाली और किसानों के हित में किए जाने वाले कामों की वजह से मिला है। यह भारत के लिए गर्व की बात है कि एक भारतीय संस्था ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अमूल की शुरुआत 1946 में गुजरात के आनंद जिले से हुई थी। तब किसानों को दूध का सही मूल्य नहीं मिल पाता था। यह समस्या दूर करने के लिए डॉ. वर्गीज कुरियन और स्थानीय किसानों ने मिलकर सहकारी मॉडल के रूप में अमूल को खड़ा किया। आज अमूल से 36 लाख से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। किसान अपना दूध सीधे सहकारी समितियों को देते हैं और उन्हें उसका उचित मूल्य सीधे मिलता है, जिससे उनकी आय में लगातार सुधार हुआ है।
आज अमूल दूध, दही, घी, पनीर, मक्खन, आइसक्रीम और चॉकलेट जैसे कई उत्पाद बनाता है और इन्हें भारत सहित कई देशों में भेजता है। अमूल की सफलता की सबसे बड़ी वजह है—किसानों और उपभोक्ताओं के बीच भरोसा। अमूल सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का प्रतीक बन चुका है। विश्व में नंबर 1 स्थान मिलना भारत के किसानों और सहकारी भावना की बड़ी जीत है।