बेंगलुरु में बनेगा 1300 करोड़ का टोल-फ्री कॉरिडोर, प्रॉपर्टी टैक्स से वसूली जाएगी लागत

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देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट सामने आया है। शहर में करीब 1300 करोड़ रुपये की लागत से एक नया कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इस सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोगों से कोई टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसके बजाय परियोजना की लागत प्रॉपर्टी टैक्स आधारित मॉडल के जरिए वसूली जाएगी।

यह प्रस्तावित कॉरिडोर स्वामी विवेकानंद मेट्रो स्टेशन को सिल्क बोर्ड जंक्शन से जोड़ेगा और इंदिरानगर, डोमलुर, कोरमंगला तथा मदीवाला जैसे प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगा। लगभग 11.625 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में से एक पर ट्रैफिक दबाव को कम करना है।

बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) के लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में टोल वसूली के विकल्प का भी अध्ययन किया गया था। हालांकि रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि सड़क के मिश्रित ढांचे के कारण टोल मॉडल व्यावहारिक नहीं होगा। कॉरिडोर में एलिवेटेड सेक्शन, रैंप, मौजूदा फ्लाईओवर और ग्राउंड-लेवल सड़कें शामिल होंगी, जिससे टोल कलेक्शन प्रणाली को लागू करना जटिल और महंगा साबित हो सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रैफिक सर्वे के अनुसार टोल चुकाने वाले वाहनों की संख्या इतनी नहीं होगी कि उससे परियोजना की लागत और संचालन खर्च की भरपाई हो सके। इसी वजह से इस प्रोजेक्ट को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत बिना टोल लागू करने का सुझाव दिया गया है।

परियोजना के लिए ‘वैल्यू कैप्चर फाइनेंसिंग’ मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है। इस मॉडल के तहत कॉरिडोर के आसपास स्थित उन संपत्तियों से अतिरिक्त टैक्स लिया जाएगा, जिन्हें बेहतर कनेक्टिविटी, कम यात्रा समय और बढ़ी हुई भूमि कीमतों का सीधा लाभ मिलेगा। यह विशेष शुल्क BBMP के मौजूदा प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम के माध्यम से वसूला जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल उन लोगों को परियोजना की लागत में भागीदार बनाएगा, जिन्हें इस इंफ्रास्ट्रक्चर से सबसे अधिक फायदा होगा। साथ ही यात्रियों को टोल-फ्री यात्रा का लाभ मिलेगा और शहर में भविष्य की परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक स्थायी वित्तीय मॉडल विकसित हो सकेगा।

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो बेंगलुरु देश का ऐसा प्रमुख शहर बन सकता है जहां बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स की लागत सीधे टोल के बजाय संपत्ति मूल्य वृद्धि से जुड़े टैक्स के माध्यम से वसूली जाएगी।

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