बॉम्बे हाई कोर्ट का 22 साल बाद लोनावाला स्थित बंगला किरायेदार को खाली करने का आदेश

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मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने अहम फैसले में लोनावाला स्थित बंगले से 22 साल बाद किरायेदार को बंगला खाली करने का आदेश दिया है. बता दें कि अपीलीय न्यायाधिकरण ने 2002 में किरायेदार को परिसर खाली करने का आदेश दिया था. किरायेदार ने इसके खिलाफ 2003 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और परिसर खाली करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगवा ली थी. अंततः 22 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अपना अंतिम फैसला सुनाया.

क्या है मामला – लोनावला स्थित एक बंगले के कुछ कमरे मालिक ने मुंबई में रहने वाले एक व्यक्ति को किराए पर दिए थे. किरायेदार यहां स्थायी रूप से नहीं रहता था लेकिन कभी-कभी यहां आता है. इस मकान मालिक ने मांग की कि किरायेदार से उसे यह जगह को खाली करने का आदेश दिया जाए.

क्या है किरायेदार का दावा – मुंबई की हवा हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है. इसलिए हम इस बंगले में सिर्फ आराम के लिए आते हैं. अगर हम यह जगह खाली कर दें, तो लोनावला में कहीं और ऐसा घर मिलना मुमकिन नहीं है.

हमने मालिक को पहले ही बता दिया था कि हम यहां कभी-कभार रहेंगे. इसलिए, किरायेदार ने अदालत से अनुरोध किया था कि मालिक द्वारा जगह खाली करने के लिए दायर की गई अपील को रद्द कर दिया जाए.

क्या है मकान मालिक का दावा – दरअसल, यह किरायेदार यहां स्थायी रूप से नहीं रहता. हमारा परिवार बहुत बड़ा है, इसलिए अब हमारे रहने की जगह हमारे लिए पर्याप्त नहीं है |

इसलिए हमें अपनी जगह वापस चाहिए, इसलिए किरायेदार को जगह खाली करने का आदेश दिया जाए, ऐसी मांग अपील कोर्ट में की गई थी, जिसे अपील कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और किरायेदार को जगह खाली करने का आदेश दिया. इसलिए, याचिका के माध्यम से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि हाई कोर्ट द्वारा इस पर लगाई गई रोक को रद्द किया जाए.

क्या है हाईकोर्ट का फैसला – जस्टिस मिलिंद साठे की एकल पीठ के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई हुई. जिसमें किरायेदार ने जगह अपने पास रखने के लिए कोर्ट के समक्ष विभिन्न कारण बताए.

उन्होंने एक अजीब दावा यह भी किया कि वे निम्न रक्तचाप से पीड़ित हैं, इसलिए वे आराम के लिए मुंबई से लोनावाला जाते हैं. हालांकि, इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है, क्या निम्न रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति इसे कम करने के लिए मुंबई से लोनावाला तक यात्रा कर सकता है?, यह सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने किरायेदार को जगह खाली करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है.

हालांकि, इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है, क्या निम्न रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति इसे कम करने के लिए मुंबई से लोनावाला तक यात्रा कर सकता है?, यह सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने किरायेदार को जगह खाली करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है.

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