सरकार ने गलत सूचनाओं से निपटने के लिए तेज़ और सटीक प्रतिक्रिया पर दिया ज़ोर, नौकरशाहों को नए युग के मीडिया पर किया जा रहा प्रशिक्षित

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नई दिल्ली।  केंद्र सरकार अब फेक न्यूज़ और भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ़ और अधिक सक्रिय रुख अपना रही है। अधिकारियों को सोशल मीडिया, पॉडकास्ट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के प्रभावी उपयोग के लिए संवेदनशील बनाया जा रहा है, ताकि सरकारी नीतियों और योजनाओं से जुड़ी सही जानकारी जनता तक तुरंत पहुँचाई जा सके।

‘विकसित भारत के लिए संपर्क और संचार’ सम्मेलन

पिछले सप्ताह सभी सचिव-स्तर के अधिकारियों के लिए एक दिवसीय सम्मेलन — “विकसित भारत के लिए संपर्क और संचार” — आयोजित किया गया।
इस बैठक में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा, रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन सहित कई शीर्ष नौकरशाह मौजूद रहे।

सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन में अधिकारियों को बताया गया कि कैसे आधुनिक संचार उपकरणों, सोशल मीडिया रणनीतियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रसारित किया जा सकता है।

नए मीडिया के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया पर ज़ोर

संचार और सूचना प्रसार के क्षेत्र में तेज़ी से बदलते परिदृश्य को देखते हुए सरकार अब नौकरशाहों को “त्वरित और तीखी प्रतिक्रिया देने” के लिए प्रशिक्षित कर रही है।
इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी गलत सूचना या अफवाह के प्रसार पर तुरंत सही तथ्य और आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने रखा जा सके।

साइकर (सिविल सर्विसेज ट्रेनिंग विंग) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बताया गया कि फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब और पॉडकास्ट जैसे नए युग के माध्यम अब सरकारी नीतियों की सही व्याख्या करने के सबसे प्रभावी मंच बन चुके हैं।

भारत की डिजिटल शक्ति — एक विशाल दर्शक वर्ग

अधिकारियों को बताया गया कि भारत में आज 900 मिलियन से अधिक लोग ऑनलाइन सक्रिय रहते हैं, जबकि 600 मिलियन से अधिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं।
लोग औसतन दो घंटे से अधिक समय प्रतिदिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं।
ऐसे में सरकार के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह सही सूचनाओं को तेज़ी और विश्वसनीयता के साथ जन-जन तक पहुँचाए।

AI और स्थानीय भाषाओं का इस्तेमाल

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्थानीय भाषाओं के प्लेटफॉर्म्स, रीजनल सोशल मीडिया अकाउंट्स और AI आधारित विश्लेषण का उपयोग बढ़ाएँ।
इससे न केवल संदेशों की पहुँच बढ़ेगी, बल्कि गलत सूचनाओं के प्रसार के पहले ही चरण में रोकथाम संभव होगी।

साथ ही, यह भी सुझाव दिया गया कि संभावित विवाद या गलत व्याख्या की स्थिति में पूर्व-अनुमोदित सामग्री (pre-approved content) तैयार रखी जाए, ताकि बिना देरी के प्रतिक्रिया दी जा सके।

360 डिग्री संचार तंत्र पर ज़ोर

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि सरकार को “360 डिग्री संचार इकोसिस्टम” विकसित करना चाहिए, जिसमें नागरिकों की प्रतिक्रिया, सुझाव और शिकायतों को नीतिगत सुधारों का हिस्सा बनाया जाए।
इसके तहत प्रत्येक मंत्रालय और विभाग को अपने क्षेत्र से जुड़ी ऑनलाइन चर्चाओं, ट्रेंड्स और पब्लिक सेंटिमेंट पर नज़र रखनी होगी।

सार्वजनिक संवाद का नया दौर

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह पहल “रक्षात्मक नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी” की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जनता तक योजनाओं, सुधारों और नीतिगत फैसलों की सटीक जानकारी सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुँचे — किसी तीसरे माध्यम से नहीं।

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