लक्ष्मी मित्तल की रिफाइनरी तक पहुँचा रूसी तेल, ब्लैकलिस्ट जहाजों से हुई ढुलाई — अमेरिका-यूरोप की जांच तेज़

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भारत के उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल के ऊर्जा संयुक्त उद्यम एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL) पर अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों की आंच पड़ती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मित्तल एनर्जी से जुड़ी पंजाब की गुरु गोबिंद सिंह रिफाइनरी ने इस वर्ष लगभग 280 मिलियन डॉलर मूल्य के रूसी कच्चे तेल के चार शिपमेंट खरीदे हैं — और इनमें से अधिकांश प्रतिबंधित (blacklisted) जहाजों से भारत तक पहुंचे।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और यूरोप रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव बढ़ा रहे हैं, और भारत सहित अन्य देशों से रूसी तेल की खरीद सीमित करने की अपील कर रहे हैं।

 रूसी बंदरगाह से भारत तक — प्रतिबंधित जहाजों की गुप्त यात्रा

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2025 के बीच रूस के आर्कटिक बंदरगाह मरमांस्क से ओमान की खाड़ी तक तेल की ढुलाई ऐसे टैंकरों से हुई, जो अमेरिका की प्रतिबंध सूची में पहले से शामिल थे। भारत तक अंतिम यात्रा एक “समाधा” (Samadha) नामक टैंकर द्वारा पूरी की गई, जिसे यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध सूची में रखा है, हालांकि यह अमेरिकी सूची में नहीं है।

तेल की इन खेपों को ले जाने वाले जहाजों ने अपनी वास्तविक स्थिति और मार्ग छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर दिए या झूठे सिग्नल प्रसारित किए — ताकि उनके मूवमेंट को ट्रैक करना कठिन हो जाए।

ट्रांसपोंडर बंद, नकली लोकेशन — “भ्रामक शिपिंग तकनीक” का इस्तेमाल

सैटेलाइट इमेजरी और शिपिंग डेटा के विश्लेषण से पता चला कि “समाधा” नामक टैंकर ओमान की खाड़ी में बार-बार ऐसे टैंकरों के साथ खड़ा होता था, जिन्हें अमेरिका पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुका है — जैसे Belgorod, Dignity, Primorye और Danshui।

इन जहाजों ने “शिप-टू-शिप ट्रांसफर” की प्रक्रिया अपनाई, यानी समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित किया गया। ऐसा आमतौर पर तब किया जाता है जब किसी प्रतिबंधित देश या कंपनी से माल की वास्तविक उत्पत्ति छिपानी हो।

  रिफाइनरी और रूसी कंपनी के दस्तावेज़ों से पुष्टि

एफ़टी (Financial Times) द्वारा देखे गए भारतीय सीमा शुल्क रिकॉर्ड्स में दर्ज दस्तावेज़ बताते हैं कि इन चारों शिपमेंट्स का मूल्य कुल 277 मिलियन डॉलर था, और खरीदार था HMEL, जबकि विक्रेता था रूस के सेंट पीटर्सबर्ग की कंपनी Varda LLC।

दस्तावेज़ों में “समाधा” को वाहक (carrier) के रूप में दर्ज किया गया है। तेल के ग्रेड — Novy Port और Arco — वही हैं जिन पर अमेरिका ने जनवरी 2025 में आर्कटिक तेल व्यापार को लेकर प्रतिबंध लगाए थे।

 गुरु गोबिंद सिंह रिफाइनरी का संचालन

पंजाब के बठिंडा जिले में स्थित गुरु गोबिंद सिंह रिफाइनरी भारत की दसवीं सबसे बड़ी रिफाइनरी है, जिसकी वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता 11.3 मिलियन टन है।
यह रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और मित्तल एनर्जी इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच 49-49% हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम है।

रिफाइनरी तक तेल की खेप गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से 1,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के ज़रिए पहुँचती है।

 अमेरिकी विशेषज्ञों की चेतावनी

पूर्व अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी और सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी की निदेशक एमिली किलक्रीस ने चेतावनी दी कि किसी भी खरीदार को अपनी “पूरी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain)” की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि अनजाने में वह किसी प्रतिबंधित लेनदेन का हिस्सा न बन जाए।

उन्होंने कहा —

“अगर मैं किसी खरीदार को सलाह दे रही होती, तो मैं चाहती कि उसे पूरी परिवहन श्रृंखला पर स्पष्ट दृश्यता हो। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे किसी प्रतिबंधित गतिविधि से सिर्फ़ एक या दो कदम दूर नहीं हैं।”

भारत पर बढ़ रहा है पश्चिमी दबाव

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक बन गया है। पश्चिमी खरीदारों द्वारा दूरी बनाए जाने के बाद, भारत को रूसी तेल भारी छूट (Discount) पर मिल रहा है।

डेटा एनालिटिक्स कंपनी Kpler के अनुसार, रूस इस वर्ष प्रतिदिन औसतन 50 लाख बैरल समुद्री तेल का निर्यात कर रहा है, जिसमें से 17 लाख बैरल प्रतिदिन भारत द्वारा खरीदे जा रहे हैं।

अमेरिका ने हाल ही में रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों Rosneft और Lukoil पर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया जा सके।

 ब्रिटेन और ईयू के निशाने पर “समाधा” टैंकर

“समाधा” टैंकर अब ब्रिटेन द्वारा भी प्रतिबंधित किया जा चुका है।
इसका मालिकाना हक़ Erica Freight Ltd. नामक कंपनी के पास बताया जाता है, जिसका रजिस्ट्रेशन सेशेल्स में है। यही पता 13 अन्य “Shadow Fleet” जहाजों का भी है — ऐसे जहाज जिनका स्वामित्व और संचालन जानबूझकर अस्पष्ट रखा जाता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचा जा सके।

  निष्कर्ष

लक्ष्मी मित्तल का यह ऊर्जा उपक्रम अब एक जटिल भूराजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में है। जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि HMEL को इन जहाजों की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी या नहीं, परंतु यह मामला अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में “ग्रे ज़ोन” ऑपरेशन्स की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है।

रूसी तेल पर पश्चिमी प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को विभाजित कर दिया है — और भारत जैसे देशों के लिए अब यह आर्थिक अवसर और कूटनीतिक दबाव — दोनों का मिश्रण बन गया है।

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