राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने शनिवार (25 अक्टूबर, 2025) को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह बिहार में छठ पूजा के दौरान यात्रियों को उनके गृह स्थान तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त ट्रेनें नहीं चला रहा है। उन्होंने कहा कि इस वजह से लोग “अमानवीय परिस्थितियों में यात्रा करने के लिए मजबूर” हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर छठ पर्व के अवसर पर खचाखच भरी ट्रेनों में बिहार आने वाले यात्रियों का वीडियो भी साझा किया। लालू प्रसाद ने लिखा, “झूठ के बेताज बादशाह और खोखले वादों के नेता ने दावा किया था कि देश की कुल 13,198 ट्रेनों में से 12,000 ट्रेनों को छठ पर्व के लिए बिहार भेजा जाएगा। यह भी एक सफेद झूठ निकला। मेरे साथी बिहारियों को अमानवीय तरीके से यात्रा करने के लिए मजबूर किया जाता है।”
भाजपा की दावों पर प्रतिक्रिया
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हाल ही में बिहार में आयोजित एक रैली में कहा था कि रेलवे मंत्रालय ने छठ पर्व के दौरान यात्रियों की भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 12,000 कर दी है। लालू प्रसाद ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बिहार के लोग, जो पिछले 20 वर्षों से एनडीए शासन के कारण पलायन का दर्द झेल रहे हैं, छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी घर लौटने के लिए सुविधाजनक ट्रेन सेवा नहीं पा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रियों को खचाखच भरी ट्रेनों में यात्रा करने के लिए मजबूर करना शर्मनाक है और यह सीधे तौर पर सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है। लालू ने इसे डबल इंजन सरकार की गलत नीतियों का परिणाम बताया, जिससे हर साल बिहार से लगभग 4 करोड़ लोग काम की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन कर रहे हैं।
बिहार में औद्योगिक विकास पर सवाल
लालू प्रसाद ने यह भी कहा कि बिहार में कई औद्योगिक इकाइयों के दावे के बावजूद एनडीए सरकार ने अब तक कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं किया है, और इसे उन्होंने बिहार विरोधी कदम बताया। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में विकास की बजाय पलायन और असमानता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
छठ पूजा और विधानसभा चुनाव का संदर्भ
राजद नेता के आरोप ऐसे समय में आए हैं जब 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होना है, और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। छठ पूजा के अवसर पर ट्रेन सेवा की कमी और केंद्र पर यह आरोप राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है, जिससे चुनावी माहौल में और जोड़-तोड़ बढ़ सकती है।
लालू प्रसाद के बयान ने रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है कि वे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएँ। उनका कहना है कि बिहारियों की आस्था और परंपरा के प्रति यह उपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक रूप से गंभीर नतीजे ला सकती है।