हेल्दी लाइफ का आसान फॉर्मूला! हफ्ते में सिर्फ 90-120 मिनट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मिल सकते हैं कई बड़े फायदे

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अगर आप फिट, एक्टिव और लंबी उम्र तक स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो अपने वीकली फिटनेस रूटीन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) को जरूर शामिल करें। अक्सर लोग मानते हैं कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग केवल बॉडीबिल्डर्स या जिम जाने वालों के लिए होती है, लेकिन अब नई रिसर्च बताती है कि यह हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन (British Journal of Sports Medicine) में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, हफ्ते में केवल 90 से 120 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने और शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकती है।

रिसर्च में करीब 1.47 लाख लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का लगभग 30 वर्षों तक विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वाले लोगों में कई गंभीर बीमारियों से मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत कम देखा गया।


क्या है स्ट्रेंथ ट्रेनिंग?

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ऐसी एक्सरसाइज होती है जिसमें मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए शरीर को किसी प्रकार के प्रतिरोध (Resistance) के खिलाफ काम करना पड़ता है।

इसके कुछ सामान्य उदाहरण हैं—

  • वेट लिफ्टिंग
  • डंबल एक्सरसाइज
  • रेजिस्टेंस बैंड वर्कआउट
  • पुश-अप्स
  • स्क्वैट्स
  • लंजेस
  • प्लैंक
  • बॉडी वेट एक्सरसाइज

जरूरी नहीं कि इसके लिए महंगे जिम की जरूरत हो। कई एक्सरसाइज घर पर भी आसानी से की जा सकती हैं।


1. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है

स्टडी के अनुसार, जो लोग सप्ताह में 90–120 मिनट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते थे, उनमें हृदय संबंधी बीमारियों से मृत्यु का जोखिम लगभग 19 प्रतिशत तक कम पाया गया।

नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से—

  • ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
  • शरीर में रक्त संचार बेहतर हो सकता है।
  • मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
  • मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम करता है।

2. दिमाग और नर्वस सिस्टम की सेहत को मिल सकता है फायदा

रिसर्च में यह भी सामने आया कि नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वाले लोगों में न्यूरोलॉजिकल (दिमाग और नर्वस सिस्टम) से जुड़ी बीमारियों से मृत्यु का जोखिम लगभग 27 प्रतिशत तक कम देखा गया।

हालांकि यह अध्ययन संबंध (association) दिखाता है, यह सीधे कारण (cause) साबित नहीं करता।


3. कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का कॉम्बिनेशन सबसे बेहतर

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वेट उठाना ही पर्याप्त नहीं है।

अगर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ आप—

  • तेज चलना
  • जॉगिंग
  • साइकिलिंग
  • स्विमिंग
  • डांस
  • एरोबिक एक्सरसाइज

जैसी कार्डियो एक्टिविटी भी करते हैं, तो शरीर को और ज्यादा फायदा मिल सकता है।

दोनों तरह की एक्सरसाइज मिलकर—

  • दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।
  • मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं।
  • स्टैमिना बढ़ा सकती हैं।
  • वजन नियंत्रित रखने में सहायक हो सकती हैं।

4. उम्र बढ़ने के साथ भी रह सकते हैं एक्टिव

बढ़ती उम्र में सबसे बड़ी चुनौती मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन बनाए रखना होता है।

नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से—

  • मांसपेशियां मजबूत रह सकती हैं।
  • हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
  • गिरने और फ्रैक्चर का खतरा कम हो सकता है।
  • रोजमर्रा के काम आसानी से किए जा सकते हैं।
  • लंबे समय तक आत्मनिर्भर रहने में सहायता मिल सकती है।

5. वजन और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी मदद

फिटनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग—

  • कैलोरी बर्न करने में मदद करती है।
  • शरीर की मांसपेशियों का प्रतिशत बढ़ा सकती है।
  • फैट कम करने में सहायक हो सकती है।
  • इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
  • टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में योगदान दे सकती है।

हफ्ते में कितना समय देना चाहिए?

स्टडी के अनुसार—

  • सप्ताह में 90–120 मिनट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर्याप्त मानी गई।
  • इसे 2 से 3 दिनों में बांटा जा सकता है।
  • हर सेशन लगभग 30–45 मिनट का हो सकता है।

शुरुआत हमेशा हल्के वर्कआउट से करें और धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाएं।


किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

अगर आपको—

  • हृदय रोग
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • जोड़ों की गंभीर समस्या
  • हाल ही में सर्जरी हुई हो
  • पुरानी चोट हो

तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रमाणित फिटनेस ट्रेनर की सलाह जरूर लें।


फिटनेस एक्सपर्ट्स की सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी सेहत के लिए केवल एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और नियमित शारीरिक गतिविधि भी उतनी ही जरूरी है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार शुरू करना चाहिए और सही तकनीक के साथ करना चाहिए ताकि चोट का खतरा कम रहे।

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