आतंकी मॉड्यूल जांच: फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी ने हिरासत में लिए गए डॉक्टरों से दूरी बनाई

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फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय ने बुधवार को कहा कि उसका उन दो डॉक्टरों से कोई संबंध नहीं है, जिनमें से एक को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ‘‘अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी मॉड्यूल’’ के संबंध में गिरफ्तार किया है और दूसरा दिल्ली विस्फोट का मुख्य संदिग्ध है। विश्वविद्यालय ने कहा कि उनका उन दो डॉक्टरों से कोई संबंध नहीं है, जो उन्होंने अपनी आधिकारिक हैसियत से किए थे।

अल-फ़लाह की कुलपति डॉ. भूपिंदर कौर आनंद ने विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा, “हमें पता चला है कि हमारे दो डॉक्टरों को जाँच एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि विश्वविद्यालय का इन लोगों से कोई संबंध नहीं है, सिवाय इसके कि वे विश्वविद्यालय में आधिकारिक पदों पर कार्यरत हैं।”

संस्थान के आपातकालीन विभाग में कार्यरत जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. मुज़म्मिल गनई को 30 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके किराए के घर से 350 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद करने का दावा किया है। दूसरे डॉक्टर, डॉ. उमर नबी भट, जिन्हें पुलिस इस मॉड्यूल का कथित सरगना बता रही है, पर सोमवार शाम लाल किले के पास हुए विस्फोट में 9 लोगों की जान लेने वाली हुंडई i20 कार चलाने का संदेह है। अल फलाह में ही कार्यरत डॉ. शाहीन अंसारी को भी इस मामले में हिरासत में लिया गया है।

विश्वविद्यालय के बयान में यह भी कहा गया है कि कुछ ऑनलाइन रिपोर्ट जानबूझकर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रही हैं। बयान में कहा गया है, “विश्वविद्यालय इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त करता है कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और साख को धूमिल करने के स्पष्ट इरादे से निराधार और भ्रामक कहानियाँ प्रसारित कर रहे हैं। हम ऐसे सभी झूठे और अपमानजनक आरोपों की कड़ी निंदा करते हैं और उनका स्पष्ट रूप से खंडन करते हैं।”

इसमें यह भी दावा किया गया है कि पिछले कुछ दिनों में हरियाणा और दिल्ली पुलिस द्वारा की गई तलाशी के दौरान विश्वविद्यालय परिसर या इसकी प्रयोगशालाओं में कोई भी समस्याग्रस्त ‘रसायन’ या ‘सामग्री’ नहीं मिली।

डॉ. आनंद ने एक बयान में कहा, “इसके द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी ऐसे रसायन या पदार्थ का उपयोग, भंडारण या संचालन नहीं किया जा रहा है, जैसा कि कुछ प्लेटफार्मों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है। विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं का उपयोग केवल और केवल एमबीबीएस छात्रों और अन्य अधिकृत पाठ्यक्रमों की शैक्षणिक और प्रशिक्षण आवश्यकताओं के लिए किया जाता है। प्रयोगशाला की प्रत्येक गतिविधि नियामक प्राधिकरणों द्वारा निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल, वैधानिक मानदंडों और नैतिक मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए की जाती है।

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