भारतीय वायुसेना के राफेल फ्लीट अब दुश्मन देश पर मेटियोर मिसाइलों से कहर ढाने को तैयार हो रहे हैं। रक्षामंत्रालय इसके लिए 1500 करोड़ के सौदे पर विचार कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की तबाही का पर्याय बने राफेल विमान अब दुश्मनों पर और अधिक कहर बरपाने को तैयार हो रहे हैं। भारत ने हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइलों में शुमार मेटियोर मिसाइलों की खरीद के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसका मकसद भारतीय वायुसेना की ताकत को पहले से कई गुना अधिक फौलादी बनाना है। अगर यह सौदा तय हुआ तो अब राफेल फ्लीट से दुश्मनों पर मेटियोर मिसाइलें कहर बनकर टूटेंगी।
भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी
भारत का अधिक मेटियोर मिसाइलें हासिल करने का कदम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हुई हाल की कार्रवाइयों से प्राप्त अनुभवों पर आधारित है। इस अभियान में भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तानी सैन्य और आतंकी ठिकानों पर प्रभावी ढंग से हमला किया था। लिहाजा अब भारत अपनी वायु शक्ति के वर्चस्व को और अधिक मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। इसमें भारतीय वायु सेना के राफेल लड़ाकू विमानों के लिए मेटियोर बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) एयर-टू-एयर मिसाइलों की नई खेप खरीदना शामिल है।
1500 करोड़ के सौदे पर मंथन
रक्षा मंत्रालय लगभग 1,500 करोड़ रुपये मूल्य के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसमें ये उन्नत यूरोपीय मिसाइलें शामिल हैं। यह अपनी सटीकता और विस्तारित रेंज के लिए जानी जाती हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार यूरोपीय निर्माता एमबीडीए से अतिरिक्त मेटियोर मिसाइलें खरीदने का प्रस्ताव अपनी अंतिम अवस्था में है और उच्च स्तरीय रक्षा बैठक में इसे जल्द ही अनुमोदन मिलने की उम्मीद है।
क्या है मेटियोर मिसाइल
मेटियोर मिसाइल वैश्विक स्तर पर सबसे उन्नत एयर-टू-एयर हथियारों में से एक मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 200 किलोमीटर है, जो राफेल फ्लीट को बेजोड़ हवाई श्रेष्ठता प्रदान करती है। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा संचालित राफेल जेट वर्तमान में ये यूरोप निर्मित मिसाइलें लॉन्च करने वाले एकमात्र विमान हैं। 2016 में फ्रांस से प्राप्त 36 राफेल जेट्स की प्रारंभिक खेप मेटियोर से लैस थी। आगामी 26 नौसेना संस्करणों के राफेल भी अब इन मिसाइलों से सुसज्जित होंगे। इन्हें अगले कुछ वर्षों में शामिल किए जाने की उम्मीद है।