‘परिवार के मुद्दों का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए’, इम्फाल में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

88 0

अपने मणिपुर दौरे के दूसरे दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक एकता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार के मुद्दों का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तीन दिवसीय दौरे पर मणिपुर पहुंचे हैं। अपने इस दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को उन्होंने इंफाल में जनजातीय नेताओं के साथ बैठक के दौरान सामाजिक एकता का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि उनका संगठन ‘‘समाज को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से समर्पित है।’’ मोहन भागवत ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी के खिलाफ नहीं है; इसका गठन समाज को नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को समृद्ध करने के लिए किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि संघ न तो राजनीति करता है और न ही किसी संगठन को ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलाता है, तथा यह केवल मित्रता, स्नेह और सामाजिक सद्भाव के माध्यम से काम करता है।

हम अपनी साझा चेतना के कारण एकजुट’

भारत की सभ्यतागत निरंतरता पर जोर देते हुए मोहन भागवत ने कहा, ‘‘हम अपनी साझा चेतना के कारण एकजुट हैं। अपनी सुंदर विविधता के बावजूद, हम एक सभ्यतागत परिवार के सदस्य हैं। एकता के लिए एकरूपता की आवश्यकता नहीं होती।’’ भागवत ने समाज को एकजुट करने के लिए आरएसएस संस्थापक डॉ. के. बी. हेडगेवार के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि संघ की स्थापना बाहरी ताकतों की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक फूट को दूर करने के लिए की गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस एक व्यक्ति-निर्माण और चरित्र-निर्माण आंदोलन है।’’ आरएसएस प्रमुख ने हर किसी से शाखाओं में जाने के लिए कहा ताकि वे समझ सकें कि संघ जमीनी स्तर पर कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता के प्रति समर्पण के साथ समाज की बेहतरी के लिए काम करने वाला कोई भी व्यक्ति पहले से ही अघोषित ‘स्वयंसेवक’ है।

‘संवाद एकता पर आधारित होना चाहिए’

जनजातीय नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उन्होंने कहा कि उनके मुद्दे राष्ट्रीय चिंता का विषय हैं जिनका संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘परिवार के मुद्दों का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए। संवाद एकता पर आधारित होना चाहिए, न कि अनुबंधात्मक सौदेबाजी पर।’’ संघ प्रमुख ने रेखांकित किया कि कई क्षेत्रीय मुद्दों और विभाजनों की ऐतिहासिक जड़ें औपनिवेशिक नीतियों में हैं। उन्होंने जनजातीय नेताओं से स्वदेशी परंपराओं, भाषाओं और लिपियों पर गर्व करने तथा सांस्कृतिक पहचान पर आधारित स्वदेशी जीवनशैली अपनाने का भी आग्रह किया।

‘भारत एक प्राचीन और सतत सभ्यता’

मोहन भागवत ने अलग से, युवा नेताओं के साथ बातचीत में युवाओं से आग्रह किया कि वे यह पहचानें कि भारत कोई हाल की शताब्दियों में बना राष्ट्र नहीं है, बल्कि यह एक प्राचीन और सतत सभ्यता है। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए भागवत ने कहा कि आरएसएस शाखाओं का उद्देश्य जिम्मेदार, सक्षम और नि:स्वार्थ नागरिक तैयार करना है जो देश के लिए अपने कौशल और प्रतिभा का योगदान दे सकें।

Related Post

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, अदालत की निगरानी में जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

Posted by - June 20, 2026 0
अयोध्या स्थित Shri Ram Janmabhoomi Mandir में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च…

अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह पर भारत को दी छह महीने की राहत — रणनीतिक साझेदारी को मिली नई गति

Posted by - October 30, 2025 0
अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अपने प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट देने का निर्णय लिया…

इंदौर से मुंबई की दूरी कम करने के लिए 1.24 लाख पेड़ों की देनी होगी कुर्बानी! पर्यावरणविदों ने चेताया, जानें पूरा मामला

Posted by - November 6, 2025 0
महू-खंडवा आमान परिवर्तन परियोजना के तहत निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए घने जंगलों से होकर गुजरने वाले एक…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *