वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच देश में अब ईंधन बचत को लेकर सरकारें सक्रिय होती दिखाई दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद कई राज्यों ने पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने और सरकारी खर्च घटाने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में त्रिपुरा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ग्रुप C और ग्रुप D कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू कर दी है। अब केवल आधे कर्मचारी ही रोज़ाना दफ्तर आएंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि गैरजरूरी ईंधन की खपत कम करें, जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम तथा वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता दें। सरकार का कहना है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह एक एहतियाती कदम है।
प्रधानमंत्री की इस अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर वर्क फ्रॉम होम कल्चर को बढ़ावा देने और सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए सभी को सतर्क रहने और ईंधन बचत के उपाय अपनाने होंगे।
वहीं उत्तराखंड की धामी सरकार भी निजी क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। राज्य सरकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को बढ़ावा देने, सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल और सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” लागू करने जैसे विकल्पों पर काम कर रही है।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल पूरे देश में कंपनियों या आईटी सेक्टर के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य करने की कोई योजना नहीं है। लेकिन जिस तरह अलग-अलग राज्य ईंधन बचाने के उपाय लागू कर रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में ऊर्जा बचत को लेकर और सख्त कदम देखने को मिल सकते हैं।