दोस्ती से टकराव तक: आखिर क्यों बिगड़े ट्रंप और मेलोनी के रिश्ते, क्या बना सबसे बड़ा विवाद?

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कभी एक-दूसरे के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगी माने जाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के रिश्ते अब गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी ने न केवल अमेरिका और इटली के संबंधों पर असर डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

जब जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, तब जॉर्जिया मेलोनी उन चुनिंदा यूरोपीय नेताओं में शामिल थीं जिन्हें समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उस समय दोनों नेताओं की वैचारिक समानता और दक्षिणपंथी राजनीति के कारण अमेरिका-इटली संबंधों को “गोल्डन एरा” की शुरुआत बताया जा रहा था।

हालांकि, यह दोस्ती ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। विश्लेषकों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच मतभेद उस समय बढ़ने लगे जब अमेरिका और उसके सहयोगियों की मध्य-पूर्व नीति को लेकर यूरोप में असंतोष बढ़ा। खासतौर पर ईरान से जुड़े घटनाक्रम और उसके आर्थिक प्रभावों ने यूरोपीय देशों को चिंतित कर दिया। इटली ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका से अलग रुख अपनाया, जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने लगी।

तनाव उस समय और खुलकर सामने आया जब ट्रंप ने एक इतालवी समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए “मिन्नतें” की थीं। इस बयान ने इटली की राजनीति में हलचल मचा दी।

जॉर्जिया मेलोनी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप के दावे को “मनगढ़ंत” और “तथ्यहीन” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसी कहानियां गढ़ रहे हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

विवाद यहीं नहीं रुका। मेलोनी ने ट्रंप पर अप्रत्यक्ष रूप से आरोप लगाया कि वे अपने पुराने सहयोगियों और मित्र देशों की अपेक्षा पश्चिमी देशों के विरोधियों के प्रति अधिक नरम रुख अपनाते हैं। इस बयान को दोनों नेताओं के बीच अब तक की सबसे तीखी सार्वजनिक टिप्पणी माना जा रहा है।

तनाव का असर राजनयिक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार इटली के विदेश मंत्री ने अमेरिका का प्रस्तावित दौरा भी स्थगित कर दिया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ती खटास का संकेत माना जा रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत अहंकार का मामला नहीं है, बल्कि वैश्विक कूटनीति, सुरक्षा नीतियों और यूरोप-अमेरिका संबंधों में उभर रहे नए मतभेदों का भी प्रतीक है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेता अपने संबंध सुधारने की कोशिश करते हैं या यह टकराव और गहरा होता है।

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