कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में हुई कथित क्रॉस वोटिंग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर हलचल मचा दी है। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल जेडी(एस) के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिससे कांग्रेस को बड़ा फायदा मिला और उसके सभी पांच उम्मीदवार जीतने में सफल रहे।
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा है कि पार्टी इस पूरे मामले की गहन जांच कराएगी और यदि कोई विधायक या नेता दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अनुशासन से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक को दिल्ली तलब किया है। पार्टी नेतृत्व दोनों नेताओं से चुनावी रणनीति और क्रॉस वोटिंग की परिस्थितियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगेगा। बताया जा रहा है कि 23 जून को इस संबंध में अहम बैठक हो सकती है।
मामले की जांच के लिए भाजपा ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य सी.टी. रवि, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एन. महेश और विधायक महेश तेंगिनाकाई को शामिल किया गया है। समिति चुनाव के दौरान हुई गतिविधियों, मतदान के पैटर्न और संभावित क्रॉस वोटिंग की परिस्थितियों की जांच कर अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना भाजपा के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका है। पार्टी अब न केवल दोषियों की पहचान करना चाहती है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी रणनीति तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले पर भाजपा नेतृत्व की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।