बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में राज्य की 121 सीटों पर बंपर वोटिंग हुई. शाम 6 बजे के आंकड़े के अनुसार पहले चरण में 64.5 प्रतिशत वोटिंग हुई. अभी यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. बिहार में हुई बंपर वोटिंग का किसे नफा, किसे नुकसान होगा… समझिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं.
Bihar Assembly Elections 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले फेज में बंपर वोटिंग हुई. चुनाव आयोग से मिले आंकड़े के अनुसार शाम 6 बजे तक 121 सीटों पर 64.5 प्रतिशत मतदान हुआ. यह बिहार में अभी तक हुए सभी चुनावों में पड़े मतदान में सबसे ज्यादा है. इससे पहले साल 2000 के विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक 62.57 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. चुनाव आयोग पहले चरण के वोटिंग का आधिकारिक आंकड़ा अभी जारी करेगा. जो 64 प्रतिशत से अधिक ही होगा. पहले चरण में जिस तरह बंपर वोटिंग हुई है, उससे यह उम्मीद है कि दूसरे चरण में भी इसी तरह जमकर वोटिंग होगी. अगर ऐसा हुआ तो बिहार से अभी तक की लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती सामने आएगी.
बिहार में हुई बंपर वोटिंग के मायने क्या है? इस रिकॉर्डतोड़ मतदान से किसे नफा होगा, कौन नुकसान में रहेगा… इस पर कई चुनाव विश्लेषकों ने अपनी राय दी है. इन चुनावी विश्लेषकों की राय से बिहार की सियासी तस्वीर कुछ साफ होती नजर आ रही है.
SIR का मुद्दा हवा, बिहार के लोगों ने प्रक्रिया पर विश्वास जताया
इलेक्शन रिसर्च का काम करने वाली C-Voter के फाउंडर यशवंत देशमुख ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा- SIR में लगभग 10% की कमी हुई. फिर भी पहले चरण के मतदान में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत और कुल संख्या, दोनों ही पिछले चुनावों से आगे निकल गया. बिहार के लोगों ने प्रक्रिया और संस्थाओं में अपने विश्वास के बारे में अपनी बात रखी है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.
बंपर वोटिंग को एंटी इनकंबेंसी कहना जल्दबाजी होगीः एक्सपर्ट
आम तौर पर किसी भी चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ने को एंटी इनकंबेंसी से जोड़ा जाता है. बिहार में नीतीश कुमार बीते 20 साल से सत्ता के केंद्र में है. इतना बड़ा समय एंटी इनकंबेंसी के लिए बहुत बड़ा कारक होता है. लेकिन यशवंत देशमुख, संदीप शास्त्री, अमिताभ तिवारी जैसे चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादा वोट पड़ने का मतलब एंटी इनकंबेंसी ही हो, यह कहना जल्दबाजी होगी