निर्यात पर कैबिनेट के फैसले से बढ़ेगी वैश्विक प्रतिस्पर्धा: प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (13 नवंबर, 2025) को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्यात संबंधी फैसले भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेंगे और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करेंगे। बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission) और निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना को मंजूरी दी गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन निर्णयों से ‘मेड इन इंडिया’ को विश्व बाजार में और अधिक पहचान मिलेगी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) को मंजूरी दी है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा, एमएसएमई, पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा। यह मिशन सभी प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर परिणाम-आधारित और प्रभावी तंत्र तैयार करेगा।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी, व्यापार संचालन को सुचारू बनाएगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगी। इस योजना से छोटे और मध्यम निर्यातकों को सस्ते और सुनिश्चित वित्तीय सहयोग की सुविधा मिलेगी, जिससे उनके कारोबार का विस्तार हो सकेगा।

मोदी ने कहा कि इन निर्णयों से भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र में संरचनात्मक सुधार होंगे, जिससे देश का व्यापारिक संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों सुदृढ़ होंगे। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में निर्यात क्षेत्र का योगदान GDP में 25 प्रतिशत से अधिक हो।

इसके साथ ही, मंत्रिमंडल ने ग्रेफाइट, सीजियम, रुबिडियम और जिरकोनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की रॉयल्टी दरों को युक्तिसंगत बनाने के निर्णय को भी मंजूरी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह फैसला न केवल हरित ऊर्जा के क्षेत्र को मजबूती देगा बल्कि भारत की आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को भी सुदृढ़ करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “कैबिनेट के इन फैसलों से स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।” इन खनिजों का उपयोग बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग में होता है, इसलिए इन पर रॉयल्टी में सुधार से देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।

सरकार का कहना है कि निर्यात संवर्धन मिशन का लक्ष्य आने वाले तीन वर्षों में निर्यात में 20 प्रतिशत वृद्धि सुनिश्चित करना है। इस मिशन के तहत ‘वन डिस्टिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसे स्थानीय कार्यक्रमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की योजना है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्णयों से भारत की विनिर्माण (Manufacturing) और निर्यात क्षमता दोनों में वृद्धि होगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान को नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये फैसले न केवल भारतीय उद्योग जगत को नई दिशा देंगे बल्कि भारत की पहचान एक मजबूत, भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापारिक साझेदार के रूप में और भी स्थापित करेंगे।

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