कफ़ाला सिस्टम क्या है, और खाड़ी देशों में भारतीय कामगार कैसे होते हैं इससे प्रभावित

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सऊदी अरब ने दशकों पुराने ‘कफ़ाला सिस्टम’ (Kafala System) को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह सिस्टम लंबे समय से विदेशी कामगारों पर सख्त नियंत्रण के लिए आलोचना का विषय रहा है। भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकार ने मार्च 2025 में घोषणा की थी कि कफ़ाला सिस्टम को एक नए रोजगार मॉडल से बदला जा रहा है, जिससे वहां काम करने वाले लाखों भारतीय कामगारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

क्या है कफ़ाला सिस्टम?
‘कफ़ाला’ अरबी शब्द है, जिसका अर्थ होता है “स्पॉन्सरशिप” यानी नियोक्ता की ज़िम्मेदारी। इस सिस्टम के तहत खाड़ी देशों — जैसे सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान और यूएई — में काम करने वाले विदेशी नागरिकों की कानूनी स्थिति पूरी तरह उनके नियोक्ता (स्पॉन्सर) पर निर्भर रहती थी।
इस व्यवस्था में कामगार की रोज़गार अनुमति, पासपोर्ट और यहां तक कि निवास अनुमति (Iqama) भी उसके नियोक्ता के पास होती थी। यानी अगर कोई भारतीय कामगार नौकरी बदलना चाहता था, या अपने देश वापस जाना चाहता था, तो उसे अपने नियोक्ता से अनुमति लेनी पड़ती थी।

क्यों कहा गया इसे ‘आधुनिक गुलामी’?
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने कफ़ाला सिस्टम को ‘Modern Slavery’ यानी आधुनिक गुलामी का रूप बताया है। कारण यह था कि इस सिस्टम के तहत नियोक्ता कामगारों का शोषण करने में सक्षम होते थे — जैसे वेतन में देरी, काम के घंटे बढ़ाना, पासपोर्ट जब्त करना या काम छोड़ने की मनाही। कई मामलों में विदेशी कामगार, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल थे, मजबूरी में कठिन परिस्थितियों में काम करने को विवश होते थे। उनके पास न तो शिकायत करने की आज़ादी होती थी, न नौकरी बदलने की स्वतंत्रता।

सऊदी अरब में बदलाव क्यों ज़रूरी था?
सऊदी अरब ‘विज़न 2030’ के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को तेल निर्भरता से आगे बढ़ाकर एक आधुनिक समाज बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी पहल के तहत सरकार ने विदेशी कामगारों की स्थिति सुधारने और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप नीतियां अपनाने का निर्णय लिया।
मार्च 2025 में सऊदी सरकार ने घोषणा की कि कफ़ाला सिस्टम को नए ‘लेबर रिलेशनशिप मॉडल’ से बदल दिया जाएगा। अब विदेशी कामगार अपने रोजगार अनुबंध की अवधि पूरी होने पर नौकरी बदल सकते हैं, देश छोड़ सकते हैं, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए नए वर्क परमिट प्राप्त कर सकते हैं।

भारतीय कामगारों को क्या होगा फायदा?
सऊदी अरब में करीब 20 लाख से अधिक भारतीय कामगार कार्यरत हैं — जिनमें बड़ी संख्या निर्माण, स्वास्थ्य, आतिथ्य और घरेलू कामों से जुड़ी है। नए नियम लागू होने से उन्हें ज्यादा स्वतंत्रता, कानूनी सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियाँ मिलेंगी। अब किसी भारतीय कामगार को नियोक्ता की अनुमति के बिना नौकरी बदलने या अपने देश वापस लौटने में बाधा नहीं होगी। साथ ही, पासपोर्ट या दस्तावेज़ जब्त करने जैसी मनमानी पर रोक लगेगी।

कफ़ाला सिस्टम का अंत सऊदी अरब के श्रम सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह न केवल लाखों भारतीयों के लिए राहत की खबर है, बल्कि पूरी खाड़ी क्षेत्र में मानवाधिकार सुधारों की नई शुरुआत का संकेत भी देता है।

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