Live Updates: प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर SC सुना रहा फैसला, विधयेक मंजूरी की समयसीमा से जुड़ा है मामला

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पांच न्यायाशीधों की पीठ ने विधेयकों पर कार्रवाई करने को लेकर राज्यपाल एवं राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय करने से जुड़े ‘राष्ट्रपति के संदर्भ’ संबंधी मामले में फैसला सुनाना शुरू किया….इस खबर के लाइव अपडेट यहां देखें

उच्चतम न्यायालय ने प्रेसिडेंशियल रफेरेंस पर फैसला सुनाते हुए कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. “डीम्ड असेंट” का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा चुनी हुई सरकार कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए, ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है.

बता दें प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनने के बाद 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

जानें सुुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा

राष्ट्रपति और राज्यपाल को अपने पास पेंडिंग बिल पर फैसला लेने के समयसीमा में बांधने के मसले पर राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंसियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला इस तरह है-

1. SC ने कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती.

2. “डीम्ड असेंट” का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है.

3.SC ने कहा चुनी हुई सरकार- कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए– ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते…लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता.

4. आर्टिकल 142 प्रयोग कर सुप्रीम कोर्ट विधेयकों को मंजूरी नहीं दे सकता। यह राज्यपाल और राष्ट्रपति का अधिकार क्षेत्र में आता है.

5. SC ने कहा कि विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल अगर अपने पास रख लेता है, वह संघवाद के खिलाफ होगा. हमारी राय है कि राज्यपाल को विधेयक को दोबारा विचार के लिए लौटाना चाहिए.

6. सामान्य तौर पर राज्यपाल को मंत्रिमण्डल की सलाह पर काम करना होता है. लेकिन विवेकाधिकार से जुड़े मामले में वह खुद भी फैसला ले सकता है.

7. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है

8. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है।

9. जब गवर्नर काम न करने का फैसला करते हैं, तो संवैधानिक  कोर्ट ज्यूडिशियल रिव्यू कर सकते हैं। कोर्ट मेरिट पर कुछ भी देखे बिना गवर्नर को काम करने का लिमिटेड निर्देश दे सकते हैं।

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