गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद क्या से क्या हो गया? टीम इंडिया ने 13 महीनों में देखे ऐसे-ऐसे दिन

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गौतम गंभीर को टीम इंडिया का हेड कोच बनाए जाने की घोषणा 9 जुलाई 2024 को की गई थी. जुलाई 2024 में ही उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ व्हाइट बॉल सीरीज में पहली बार कमान भी संभाल ली थी. लेकिन, हम यहां अभी सिर्फ उन 13 महीनों की बात करेंगे, जो गौतम गंभीर ने रेड बॉल क्रिकेट में भारत की कोचिंग करते हुए बिताए हैं. टीम इंडिया के हेड कोच के तौर पर गंभीर की पहली टेस्ट सीरीज बांग्लादेश के खिलाफ पिछले साल सितंबर में रही थी. टेस्ट क्रिकेट में शुरुआत तो कोच गंभीर की जीत के साथ हुई थी. लेकिन फिर अगले 13 महीनों में टीम इंडिया को टेस्ट में ऐसे-ऐसे दिन देखने पड़े, जो उसने पहले कभी नहीं देखे थे |

न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपने ही जाल में फंसे

गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया को रेड बॉल क्रिकेट में पहला बड़ा धक्का न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में लगा. भारत का 3 मैचों के टेस्ट सीरीज में सूपड़ा साफ हुआ और पहली बार ऐसा हुआ कि न्यूजीलैंड की टीम भारत में टेस्ट सीरीज जीतने में कामयाब रही. ऐसा तब हुआ था जब टीम इंडिया ने जैसी स्पिनिंग ट्रैक मांगी थी, वैसी उसे बनाकर दी गई थी |

न्यूजीलैंड वाली रामकहानी ही टीम इंडिया के साथ गौतम गंभीर की कोचिंग में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में घटती दिख रही है. इस सीरीज के लिए भी गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट ने स्पिन ट्रैक की मांग कोलकाता में की. उनकी मर्जी की पिच उन्हें बनाकर मिली भी. मगर नतीजा वही हुआ जो न्यूजीलैंड के खिलाफ देखने को मिला था. साउथ अफ्रीका 15 साल बाद भारतीय जमीन पर टेस्ट जीतने में कामयाब रही थी |

गंभीर की कोचिंग में जो नहीं हुआ था, वो भी हुआ

न्यूजीलैंड के खिलाफ मिले सेटबैक से लेकर साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला टेस्ट गंवाने तक टीम इंडिया के साथ दूसरी बड़ी घटनाएं भी टेस्ट क्रिकेट में घटी. जैसे 13 साल बाद मैनचेस्टर में टेस्ट ना हारने का उनका सिलसिला टूटा, 10 साल के बाद उन्हें बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से हाथ धोना पड़ा, पहली बार टीम इंडिया WTC फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी. गौतम गंभीर की कोचिंग में ही भारत पहली टीम भी बना, जिसे 5 शतक लगाने बाद भी टेस्ट मैच में हार का सामना करना पड़ा |

टीम इंडिया अब नहीं रही घर की शेर

मगर इतनी नाकामियों के बीच गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया को लगा सबसे बड़ा धक्का यही है कि उस पर लगा घर के शेर का टैग टेस्ट में अब मिटने लगा है. ऐसा क्यों है, उसे इस आंकड़े से समझिए. भारत ने 2024 से अब तक यानी गंभीर की कोचिंग के दौरान भारत में 8 टेस्ट खेले हैं, जिसमें 5 हारे हैं. इसमें से 4 हार पिछले 6 टेस्ट में मिली है. वहीं साल 2011 से 2023 तक की बात करें तो भारत ने घर में 41 टेस्ट खेले हैं और उसमें सिर्फ 5 हारे हैं. वहीं 9 ड्रॉ कराए हैं |

शास्त्री और द्रविड़ के मुकाबले नहीं टिकते गंभीर

गौतम गंभीर की 13 महीनों की कोचिंग में भारत ने 18 टेस्ट खेले हैं, जिसमें से 7 जीते और 9 हारे हैं. वहीं 2 टेस्ट ड्रॉ रहे हैं. गंभीर की जीत का रेशियो सिर्फ 0.77 का है. गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया के परफॉर्मेन्स का ग्राफ कैसे गिरा है, उसका अंदाजा आप उनसे पहले कोच रहे रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ के टेस्ट में आंकड़े को देखकर भी लगा सकते हैं.

रवि शास्त्री की कोचिंग में भारत ने 45 टेस्ट खेले, जिसमें 25 में जीत मिली जबकि 13 टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा. शास्त्री की कोचिंग में जीत का रेशियो 1.92 है.

राहुल द्रविड़ की कोचिंग में भारत ने 24 टेस्ट खेले, जिसमें 14 जीते और 7 हारे हैं. बतौर कोच द्रविड़ की जीत का रेशियो 2 का है.

साफ है कि गौतम गंभीर की कोचिंग में भारतीय टेस्ट टीम ने कुछ हासिल कम किया है और गंवाया ज्यादा है. अब ऐसे में उनके कोच बने रहने पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो उसकी वजह भी जायज है

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